पाकिस्तान पंहुचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल | Qamar Cheema को लगी मिर्ची
पाकिस्तान के पत्रकार कमर चीमा कह रहे हैं कि “पाकिस्तान के अंदर इंडिया का एक डेलीगेशन आया हुआ है और ताल्लुकात जो है वो बड़े बेहतर हो रहे हैं। ऐसी कोई बात नहीं है। ये जिन लोगों को इस चीज का पता है या जिन लोगों को इस चीज की समझ है पाकिस्तान और भारत के ताल्लुकात बेहतर नहीं हो सकते और ना ही इंडियन डेलीगेशन यहां पे कोई बटरल मामलात को तय करने आया हुआ है। तो ये हमारे लोगों को थोड़ी सी अंडरस्टैंडिंग होनी चाहिए।”
वहीं पाकिस्तान कि पत्रकार आरज़ू काज़मी ने पलटवार किया और कहा कि जब भगवान अकल बांट रहे थे तो आप आंटे की लाइन में ही लगे हुए थे। वैसे बात तो सही है क्योंकि आप लोगों को ना समझ में नहीं आता खासतौर पर कमर चीमा को समझ में नहीं आता क्योंकि जिस तरह से हर एक चीज में भारत को लेकर आते हैं कि भारत हमसे बात नहीं करना चाहता मोदी जी की जो पॉलिटिक्स है वह सिर्फ पाकिस्तान पर एक तरह से आकर खत्म हो जाती है तो भाई एक बात बताओ कि शबाज शरीफ जब यूएनजीए में गए भाषण देने के लिए तो उन्होंने भारत को ही एक तरह से लपेटने की कोशिश करी अगर जवाब में जयशंकर साहब ने पलटवार किया तो फिर आपको मिर्ची क्यों लग रही है?
सबसे बड़ी चीज यह है कि भाई जो हकीकत है जयशंकर साहब ने वही कहा लेकिन फिर भी आपको तकलीफ होती है। हमें बटरल चाहिए ही नहीं भाई। क्योंकि मेन चीज क्या है ना कि हम आपके साथ में क्या करेंगे? क्या व्यापार करेंगे? क्या करेंगे? कुछ भी तो नहीं कर सकते। पर ऊपर से इतनी कोशिशें करने के बाद में भी हमें आतंकवादी हमले मिलते हैं। तो भाई हमें नहीं चाहिए यार। हमें आपके साथ में कोई रिश्ता नहीं रखना। यह तो हमारी मजबूरी बन जाती है कि कई बार इंटरनेशनल मंचों पर या फिर क्रिकेट में हमें एक साथ खड़े होना पड़ता है। वह मजबूरी बन जाती है।
वरना भारत और पाकिस्तान के डेलीगेशंस का या नेताओं का आमनासामना कभी हुई नहीं। और कम से कम चलो आप यह बात मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कभी सुधर नहीं सकते हैं। क्योंकि आप सुधारना ही नहीं चाहते। सुधारने की कोशिशें ही नहीं करना चाहते हैं। आप जिस बिजनेस में है ना आतंकवादी उसी में रमे रहना चाहते हैं ताकि आपका जो खर्चा पानी ना इसी आतंकवादियों के भरोसे चलता रहे। तो अच्छी बात है यार एंजॉय करो। हमें जरूरत नहीं है।

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